घरेलू क्रिकेट में बाएं हाथ के स्पिनरों के लिए लगातार रन बनाना एक अहम जरूरत बनता जा रहा है, और दिल्ली के सुमित मैथुर इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते नजर आ रहे हैं। झारखंड के खिलाफ जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम (JSCA Worldwide Stadium) में खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी मुकाबले से पहले अपने 14 फर्स्ट क्लास (First Class) मैचों में 28 वर्षीय इस खिलाड़ी का बल्लेबाजी औसत 40.25 दर्ज किया गया था। सोमवार को दिल्ली के पांच विकेट पर 309 रन के स्कोर में मैथुर ने नाबाद 50 रनों का योगदान दिया, जिससे उनके इस आंकड़े में और इजाफा होना तय है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुजरात के खिलाफ पिछले मैच में उन्होंने 92 रनों की शानदार पारी खेली थी और अपने खेल से काफी प्रभावित किया था। घरेलू सर्किट में खेलते हुए सुमित मैथुर की यह निरंतरता टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
सुमित मैथुर के लिए कप्तान आयुष बदानी के साथ क्रीज पर बिताया गया समय बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। झारखंड के खिलाफ इस जोड़ी ने नाबाद 128 रनों की साझेदारी की है, जो पिछले हफ्ते की 167 रनों की शानदार साझेदारी के बाद सामने आई है। अपने अनुभव और साझेदारी के महत्व को साझा करते हुए सुमित मैथुर ने बताया कि उन्हें बदानी के साथ बल्लेबाजी करने में काफी आनंद आता है क्योंकि वह एक आक्रामक स्ट्रोक-प्लेयर हैं, जबकि उन्हें खुद थोड़ा समय लेना पसंद होता है।
घरेलू क्रिकेट में सुमित मैथुर का मजबूत प्रदर्शन
बदानी की मौजूदगी से मैदान पर चीजें काफी आसान हो जाती हैं और वह इसके लिए उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं, जिससे उन्हें मैदान पर खुलकर रन बनाने में काफी मदद मिलती है। बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझते हुए उन्होंने कप्तान के साथ तालमेल को अपनी सफलता का एक अहम हिस्सा बताया है। मैदान पर दोनों खिलाड़ियों का यह तालमेल दिल्ली की टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में कारगर साबित हुआ है, जिसकी चर्चा क्रिकेट गलियारों में भी हो रही है।
कप्तान आयुष बदानी के साथ शानदार साझेदारियां
बल्लेबाजी में लगातार चमकने के बावजूद, इस ऑलराउंडर को अपनी गेंदबाजी में विकेट लेने की क्षमता को लेकर काफी सुधार करने की जरूरत है। अपने फर्स्ट क्लास करियर में इस स्पिनर ने अब तक केवल 30 बार ही सफलता हासिल की है। इस बात को पूरी ईमानदारी से स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सटीकता पर काम करने की जरूरत है और लंबे स्पेल डालने के लिए एक ही जगह पर निरंतरता बनाए रखनी होगी। अपनी गेंदबाजी के स्तर को ऊपर उठाने के लिए वह लगातार घरेलू स्तर पर अभ्यास और रणनीतियों पर ध्यान दे रहे हैं।
गेंदबाजी में सुधार और निरंतरता पर जोर
आज के समय में बल्लेबाजों के पास ज्यादा धैर्य नहीं होता है, जिसका जिक्र करते हुए मैथुर ने अपने उदाहरण से बताया कि उन्होंने एक खराब शॉट खेला था लेकिन नो-बॉल मिलने की वजह से वह बच गए। यदि कोई गेंदबाज निरंतरता के साथ गेंदबाजी करे और डॉट बॉल बनाए, तो बल्लेबाज खुद-ब-खुद गलतियां करते हैं। एक गेंदबाज के रूप में यह वह अहम पहलू है जिस पर उन्हें अभी और काम करना है ताकि वह अपनी गेंदबाजी को भी बल्लेबाजी के स्तर पर ला सकें।
इस मुकाबले और मौजूदा घरेलू सत्र के दौरान सुमित मैथुर के खेल में आई निरंतरता ने दिल्ली टीम के मध्य क्रम को काफी मजबूती दी है। हालांकि उनकी गेंदबाजी में सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है, लेकिन उनकी उपयोगी पारियां और कप्तान के साथ मजबूत साझेदारियां टीम के लिए बेहद अहम साबित हो रही हैं। आने वाले दिनों और आगामी सत्र के मैचों में उनके इस प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि वह एक ऑलराउंडर के रूप में खुद को पूरी तरह स्थापित करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान को और मजबूत करना चाहते हैं।


