फुटबॉल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन और रणनीतिक योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित करने के क्रम में लुइस डे ला फुएंटे (Luis de la Fuente) को मेन्स कोच ऑफ द ईयर (males’s coach of the 12 months) के प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर (Ballon d’Or) पुरस्कार से नवाजा गया है। लंदन (London) में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान स्पेन (Spain) की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को विश्व कप (World Cup) में ऐतिहासिक जीत दिलाने के बाद प्रदान किया गया। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को स्वीकार करते हुए 65 वर्षीय डे ला फुएंटे ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय पूरी टीम, खिलाड़ियों के आपसी तालमेल और उनके समर्पण को दिया।
खिलाड़ियों की मेहनत और टीम वर्क को दिया जीत का श्रेय
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डे ला फुएंटे ने स्पष्ट किया कि टीम वर्क सभी को अजय बनाता है और यह उनके व्यक्तिगत जीवन तथा करियर के लिए एक बेहद गर्व का पल है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस सफलता का मुख्य राज ऐसे उदार और समर्पित खिलाड़ी हैं जो हमेशा देश और टीम को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से ऊपर रखते हैं। उनके पास दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रतिभाओं का पूल उपलब्ध है, जिसके साथ काम करना किसी भी फुटबॉल कोच के लिए एक शानदार और अनोखा अनुभव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असल में यह ऐतिहासिक सफलता उन्हीं मेहनती खिलाड़ियों के परिश्रम का परिणाम है।
अंडर-19 विज्ञापन से विश्व कप की ट्रॉफी तक का अनूठा सफर
65 वर्षीय डे ला फुएंटे का फुटबॉल कोचिंग तक का सफर काफी दिलचस्प, प्रेरणादायक और कड़े संघर्षों से भरा रहा है। पूर्व में एक साधारण खिलाड़ी के रूप में ठोस करियर बनाने और क्लब कोचिंग में मामूली व अनिर्दिष्ट अनुभव के बाद, साल 2013 में उन्होंने स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन (Spanish Soccer Federation) द्वारा युवा टीम के कोच के लिए जारी किए गए एक विज्ञापन को खेल अखबारों के पन्नों पर देखा था। उन्होंने बिना देर किए इसके लिए आवेदन किया और स्पेन की अंडर-19 (Below-19) टीम के कोच की कमान संभाली। लगभग 13 साल के इस लंबे और निरंतर सफर के दौरान उन्होंने विभिन्न आयु वर्ग के स्तरों पर खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया और बाद में नेशंस लीग (Nations League), यूरो 2024 (Euro 2024) तथा विश्व कप जैसे तमाम बड़े खिताब अपनी शानदार रणनीतिक अगुवाई में जीते।
अर्जेंटीना के खिलाफ फाइनल मुकाबले की रोमांचक जीत
इस साल संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) में आयोजित टूर्नामेंट की शुरुआत से ही डे ला फुएंटे को अपनी टीम की क्षमताओं पर पूरा भरोसा था, भले ही उनका अभियान विश्व कप के पदार्पण करने वाली केप वर्डे (Cape Verde) टीम के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के साथ थोड़ा धीमा शुरू हुआ था। इसके बाद उनकी टीम ने प्रत्येक मैच के साथ अपनी लय में सुधार किया और सेमीफाइनल में टूर्नामेंट के पूर्व-टूर्नामेंट पसंदीदा में से एक फ्रांस (France) को एक बेहद臨床 और निर्णायक 2-0 से शिकस्त दी। न्यू जर्सी (New Jersey) में लियोनेल मेस्सी (Lionel Messi) की स्टार खिलाड़ियों से सजी अर्जेंटीना (Argentina) के खिलाफ खेले गए एक कड़े और रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेनिश टीम ने विरोधी टीम की आक्रामक और शारीरिक रूप से मजबूत खेल रणनीतियों का मैदान पर डटकर सामना किया। मैच के दौरान फेरान टोरेस (Ferran Torres) ने एक बेहतरीन गोल दागकर टीम को 1-0 से महत्वपूर्ण जीत दिलाई और प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया।
महिला वर्ग में बार्सिलोना के पेरे रोमियू हुए सम्मानित
दूसरी ओर, महिला वर्ग का प्रतिष्ठित कोचिंग पुरस्कार बार्सिलोना (Barcelona) क्लब के पेरे रोमियू (Pere Romeu) को प्रदान किया गया। उन्हें यह बड़ा सम्मान एक शानदार और सफल सत्र की सफल देखरेख करने के लिए मिला, जिसमें उनकी देखरेख में टीम ने स्पेनिश लीग (Spanish league), स्पेनिश कप (Spanish cup), सुपर कप (Tremendous Cup) और प्रतिष्ठित चैंपियंस लीग (Champions League) के सभी प्रमुख खिताब एक साथ अपने नाम किए थे। इस प्रकार फुटबॉल जगत के इस बड़े मंच पर दोनों ही वर्गों में उत्कृष्ट रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन करने वाले कोचों को उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया, जिसने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।


