नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अचानक फोन आया। फोन पर पुतिन ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई मुलाक़ात के पीछे की बातें साझा कीं। इस बातचीत ने वैश्विक रणनीति और भारत की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुतिन ने बताया ट्रंप से मुलाक़ात का पूरा हाल
पिछले हफ़्ते अलास्का में हुई पुतिन-ट्रंप बैठक दुनिया की सुर्खियों में रही। लेकिन इस मुलाक़ात पर पुतिन की असली राय सीधे मोदी को बताई गई। कूटनीतिक गलियारों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद का प्रमाण है।
मोदी ने दिया शांति का फ़ॉर्मूला
फोन कॉल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन का धन्यवाद करते हुए भारत का रुख साफ़ किया। उन्होंने कहा कि भारत हर संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए चाहता है। मोदी ने साफ़ संदेश दिया कि भारत किसी भी वैश्विक विवाद को युद्ध नहीं बल्कि संवाद से हल करने का पक्षधर है।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर ज़ोर
बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-रूस की दशकों पुरानी दोस्ती को और मज़बूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और विज्ञान-तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर सहमति बनी।
भारत के लिए रूस न सिर्फ हथियारों का सबसे भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता है बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में भी उसका बड़ा सहयोगी है। यही कारण है कि दोनों देशों की साझेदारी को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।
अमेरिका-रूस समीकरण और भारत की भूमिका
पुतिन का यह कदम बताता है कि रूस भारत को अमेरिका और रूस के बीच एक अहम कड़ी मानता है। भारत दोनों देशों के साथ संतुलन बनाए रखकर चल रहा है और यही वजह है कि उसे दुनिया एक भरोसेमंद शक्ति के रूप में देख रही है।
निकट संपर्क पर बनी सहमति
बातचीत के अंत में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने यह तय किया कि वे आगे भी लगातार संपर्क में रहेंगे। यह संकेत है कि आने वाले समय में भारत-रूस संबंधों में और भी बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
इस खबर की बड़ी बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्लादिमीर पुतिन का फोन
- पुतिन ने ट्रंप से मुलाक़ात का राज़ मोदी से साझा किया
- मोदी ने कहा, भारत बातचीत से हल चाहता है हर विवाद
- भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने पर सहमति
- दोनों नेता रहेंगे लगातार संपर्क में
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