पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। फलता EVM विवाद अब गंभीर जांच के दायरे में है, जहां करीब 30 बूथों पर दोबारा मतदान यानी री-पोलिंग की सिफारिश की गई है। चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता द्वारा की गई स्क्रूटनी में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिनसे मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
फलता में EVM पर टेप के आरोप से बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फलता के कई बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM पर टेप लगे होने के आरोप सामने आए हैं। यह आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि इससे मतदाताओं के विकल्प सीमित होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के अनुसार, पीठासीन अधिकारी ने दोपहर 1 बजे यह बताया कि टेप हटा दिया गया है, लेकिन तब तक उन बूथों पर करीब 58 प्रतिशत मतदान हो चुका था।
सूत्रों के अनुसार, टेप लगे होने की वजह से मतदाताओं को एक ही पार्टी को वोट देने की स्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे मतदान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। इसी कारण इन बूथों पर री-पोलिंग की सिफारिश की गई है।
कैमरे बंद और नेटवर्क फेलियर ने बढ़ाई चिंता
स्क्रूटनी के दौरान यह भी सामने आया कि कई मतदान केंद्रों पर CCTV कैमरे बंद थे और नेटवर्क की समस्या के कारण लाइव फीड कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंच पाई। यह स्थिति चुनाव प्रक्रिया की निगरानी पर गंभीर असर डालती है।
चुनाव आयोग के लिए यह एक अहम मुद्दा बन गया है क्योंकि चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीकी निगरानी बेहद जरूरी होती है।
कई बूथों पर 100 प्रतिशत मतदान, बढ़ा संदेह
फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 285 बूथ हैं, जिनमें से कई बूथों पर 100 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया है। इतनी अधिक मतदान दर भी जांच के दायरे में आ गई है।
इसके अलावा, दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर क्षेत्र के 4 बूथ और मगरहाट वेस्ट के 11 बूथों पर भी री-पोलिंग की सिफारिश की गई है। कुल मिलाकर 77 बूथों पर दोबारा मतदान की मांग की गई है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दल भाजपा ने EVM पर टेप लगाए जाने का आरोप लगाया है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने भी चुनाव के दौरान कुछ अधिकारियों के व्यवहार पर आपत्ति जताई है। फलता में तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पर कथित दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
चुनाव आयोग की निगरानी और अगला कदम
चुनाव आयोग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर स्क्रूटनी की गई और उसके आधार पर री-पोलिंग का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
अब अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है कि किन बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाएगा।
क्यों अहम है फलता EVM विवाद
यह मामला केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। अगर EVM के साथ छेड़छाड़ या तकनीकी खामियां साबित होती हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
फलता विधानसभा क्षेत्र में सामने आए EVM विवाद ने चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। री-पोलिंग की सिफारिश इस बात का संकेत है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा। अब सभी की नजर चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि इन आरोपों का क्या असर आगे की चुनाव प्रक्रिया पर पड़ेगा।




