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Reading: लैपटॉप से बनाई सरकारी नौकरी की फर्जी फाइल, SBI से ठगे 10.50 लाख – ऐसे पकड़ी गई आरोपी
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अपराध

लैपटॉप से बनाई सरकारी नौकरी की फर्जी फाइल, SBI से ठगे 10.50 लाख – ऐसे पकड़ी गई आरोपी

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Last updated: February 22, 2026 9:36 pm
Vishal K. Singh - Editor
6 months ago
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बैंक फ्रॉड: लैपटॉप से फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर, SBI से ठगे ₹10.50 लाख
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शहडोल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बैंकिंग धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से ₹10,50,500 का लोन हासिल कर लिया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने नियुक्ति पत्र से लेकर वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट तक सभी दस्तावेज लैपटॉप की मदद से फर्जी तरीके से तैयार किए थे। सोहागपुर पुलिस ने साइबर सेल की सहायता से आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

Contents
फर्जी पहचान बनाकर लिया ‘एक्सप्रेस क्रेडिट लोन’आंतरिक जांच में सामने आई सच्चाईसाइबर सेल की तकनीकी ट्रैकिंग से गिरफ्तारीलैपटॉप और इंटरनेट की मदद से तैयार किए दस्तावेजपुलिस की कार्रवाई और आगे की जांचबढ़ते साइबर और बैंकिंग फ्रॉड पर चिंता

फर्जी पहचान बनाकर लिया ‘एक्सप्रेस क्रेडिट लोन’

पुलिस के अनुसार, सागर जिले की निवासी बिशाखा दांगी (36 वर्ष) ने शहडोल के बस स्टैंड स्थित एसबीआई की कुदरी रोड शाखा में ‘एक्सप्रेस क्रेडिट लोन’ के लिए आवेदन किया था। उसने आवेदन पत्र में खुद को अनूपपुर जिले के बिजली विभाग (एमपीईबी) में ‘लाइनमैन अटेंडेंट’ के पद पर कार्यरत बताया।

लोन स्वीकृति के लिए उसने जो दस्तावेज जमा किए, वे पूरी तरह से तैयार किए गए फर्जी कागजात थे। इनमें कथित नियुक्ति पत्र, मासिक वेतन पर्ची (पे-स्लिप), विभागीय प्रमाण और बैंक स्टेटमेंट शामिल थे। दस्तावेजों की सतही जांच में सब कुछ सही प्रतीत हुआ, जिसके आधार पर बैंक ने 10 लाख 50 हजार 500 रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया।

राशि खाते में ट्रांसफर होते ही आरोपी महिला ने कुछ समय तक संपर्क बनाए रखा, लेकिन जल्द ही उसने लोन की किश्तें जमा करना बंद कर दिया और बैंक अधिकारियों के फोन कॉल्स का जवाब देना भी बंद कर दिया। इससे बैंक प्रबंधन को संदेह हुआ।

आंतरिक जांच में सामने आई सच्चाई

जब लोन की किस्तें समय पर जमा नहीं हुईं तो शाखा प्रबंधक ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कराई। विभागीय स्तर पर सत्यापन कराने पर पता चला कि बिशाखा दांगी नाम की कोई भी महिला अनूपपुर के बिजली विभाग में पदस्थ नहीं है।

इस खुलासे के बाद 02 सितंबर 2025 को सोहागपुर थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें साइबर सेल के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया।

साइबर सेल की तकनीकी ट्रैकिंग से गिरफ्तारी

पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया। तकनीकी जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन नर्मदापुरम (भोपाल संभाग) में मिली। 21 फरवरी को सोहागपुर पुलिस की टीम ने नर्मदापुरम स्थित एक किराए के मकान पर दबिश देकर महिला को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी और उसे जानकारी मिली थी कि सरकारी कर्मचारियों को बैंक से लोन आसानी से मिल जाता है। इसी का फायदा उठाने के लिए उसने पूरी साजिश रची।

लैपटॉप और इंटरनेट की मदद से तैयार किए दस्तावेज

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने लैपटॉप पर पुराने नियुक्ति आदेशों को डाउनलोड कर एडिट किया। उसने ऑनलाइन उपलब्ध सॉफ्टवेयर और यूट्यूब ट्यूटोरियल की मदद से दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया कि वे असली प्रतीत हों।

उसने नकली ऑफर लेटर, वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट तैयार किए और उन्हें लोन आवेदन के साथ संलग्न कर दिया। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं दिखी, जिससे बैंक अधिकारियों को धोखा हो गया।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। महिला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह शामिल तो नहीं है।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बैंकिंग फ्रॉड के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की ऑनलाइन वेरिफिकेशन और विभागीय पुष्टि बेहद जरूरी है। पुलिस ने आम नागरिकों और बैंक अधिकारियों से अपील की है कि किसी भी लोन आवेदन में दस्तावेजों की गहन जांच अवश्य करें।

बढ़ते साइबर और बैंकिंग फ्रॉड पर चिंता

मध्य प्रदेश सहित देशभर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी नौकरी के नाम पर लोन लेना एक आम ट्रेंड बनता जा रहा है, क्योंकि बैंकों में ऐसे आवेदनों को कम जोखिम वाला माना जाता है।

इस मामले ने यह भी दिखाया कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह वित्तीय संस्थानों को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और साइबर सेल की मदद से आरोपी तक पहुंचना संभव हुआ।

शहडोल पुलिस का कहना है कि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए बैंक और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय और डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा।

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ByVishal K. Singh
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