उत्तर प्रदेश: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर किया बड़ा हमला — गौ रक्षा और बटुकों के अपमान पर उठाए तीखे सवाल

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर अपने बेबाक और तीखे बयानों के चलते सुर्खियों में हैं। रायबरेली में यश पांडे के आवास पर प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य की सत्ताधारी भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। गौ रक्षा, संस्कृत विद्यालयों के बटुकों का अपमान, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी गई मियाद जैसे मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। उनके इन बयानों ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है।

गौ रक्षा पर सरकार को घेरा: ‘दावे झूठे, जमीन पर कुछ नहीं’

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की दुर्दशा पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए मौजूदा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार गौ रक्षा के नाम पर केवल दावे और बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। गौ हत्या आज भी बेरोकटोक जारी है और सरकार इसे रोकने के लिए कोई ठोस इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन गौ हत्या के विरुद्ध आवाज उठाता है, सरकार उस पर झूठे और फर्जी मुकदमे थोपकर उसे चुप कराने की कोशिश करती है। यह सिलसिला न सिर्फ लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है, बल्कि सनातन धर्म की मूल आस्था के साथ भी सरासर खिलवाड़ है।

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देना अब केवल मांग नहीं, बल्कि हिंदू समाज की अपेक्षा बन चुकी है। धर्म की रक्षा केवल नारों और चुनावी भाषणों से नहीं होती — इसके लिए सरकार को निर्णायक और ऐतिहासिक कदम उठाने होंगे।

बटुकों के अपमान पर भाजपा को लिया आड़े हाथों

संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों यानी बटुकों के साथ हो रहे अपमानजनक व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए शंकराचार्य ने भाजपा पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह वही पार्टी है जो खुद को हिंदुओं की पार्टी और सनातन धर्म की रक्षक बताती है, लेकिन उसी के शासनकाल में बटुकों का अपमान हो रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस अपमान के बाद भी अब तक दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शंकराचार्य के अनुसार यह सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बटुकों का अपमान करने वालों को धर्मदंड और प्रकृति का दंड अवश्य भुगतना पड़ेगा।

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योगी को दी गई 40 दिन की मियाद हुई खत्म

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी शंकराचार्य ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि योगी जी को दी गई 40 दिनों की मोहलत अब पूरी हो चुकी है। यह समय इस बात को साबित करने के लिए दिया गया था कि वे सच्चे अर्थों में हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं या नहीं — लेकिन अब तक कोई ठोस कार्ययोजना या निर्णायक कदम सामने नहीं आया।

शंकराचार्य ने कहा कि महज भगवा पहनना पर्याप्त नहीं है — हिंदू समाज को आज ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो धर्म के लिए निर्भीक होकर खड़ा हो सके और गौ रक्षा जैसे मूल मुद्दों पर अपना संकल्प स्पष्ट करे।

राजनीतिक हलचल और सुरक्षा व्यवस्था

शंकराचार्य के इन बयानों से राजनीतिक गलियारों में खासा हड़कंप मचा है। उनके प्रवास के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीओ सिटी अरुण नौहार, सदर कोतवाल शिवशंकर सिंह और मिल एरिया थाना प्रभारी बिंद विनय सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह आक्रामक रुख यह स्पष्ट करता है कि धार्मिक जगत में सत्ता के प्रति मोहभंग बढ़ता जा रहा है। गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देना हो, बटुकों के सम्मान की रक्षा हो या सनातन धर्म को कानूनी संरक्षण — इन मुद्दों पर सरकार को आश्वासन नहीं, ठोस परिणाम देने होंगे।

FAQ

प्रश्न: शंकराचार्य ने किस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की?
उत्तर: गौ रक्षा में विफलता, बटुकों के अपमान पर कार्रवाई न होने और योगी को दी गई मियाद में कोई कदम न उठाने पर।

प्रश्न: योगी आदित्यनाथ को 40 दिन की मियाद क्यों दी गई थी?
उत्तर: हिंदू हितों पर अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए — जो समयसीमा बीतने के बाद भी पूरी नहीं हुई।

प्रश्न: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य कौन हैं?
उत्तर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जो अपने निर्भीक बयानों के लिए देशभर में जाने जाते हैं।

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