बहराइच/नानपारा। जिले के नानपारा तहसील के भग्गापुरवा गांव की नूपुर पांडेय ने बड़ा इतिहास रचते हुए उत्तर प्रदेश अंडर-15 महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाई है। यह चयन उनके भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल होने के सपने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। सीमित संसाधनों और साधारण परिवेश के बावजूद नूपुर पांडेय की यह उपलब्धि जिले, प्रदेश और छोटे गांवों की बेटियों के लिए मिसाल बन गई है।
छोटे गांव से बड़े सपने: कैसे शुरू हुआ सफर
2011 में जन्मी नूपुर पांडेय की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई जब वह घर के सामने स्थित सआदत इंटर कॉलेज मैदान में लड़कों को क्रिकेट खेलते देखती थीं। प्रेरणा मिली और उन्होंने लड़कों के साथ खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग में निखार आने लगा।
उनकी प्रतिभा को पहचान मिली जब जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव इशरत महमूद खान की नजर उन पर पड़ी। उनके मार्गदर्शन से नूपुर पांडेय को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में पेशेवर प्रशिक्षण मिला, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
संघर्ष और समर्पण: परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
छोटे गांव से निकलकर बड़े शहर में प्रशिक्षण लेना आसान नहीं था।
पिता नीरज पांडे एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और मां रुचि पांडेय शिक्षामित्र हैं। आर्थिक तंगी के बीच भी परिवार ने अपनी बेटी का साथ नहीं छोड़ा।
लखनऊ में नूपुर पांडेय खुद खाना बनाती हैं और दिन में दो बार सख्त अभ्यास के लिए स्टेडियम पहुंचती हैं। कोच आसिफ रजा कहते हैं — “उनकी लगन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, और यही उन्हें एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक ले जाएगी।”
जिले में खुशी की लहर, बनी हजारों लड़कियों की प्रेरणा
यूपी अंडर-15 टीम में चयन की खबर मिलते ही जिले में खुशी का माहौल है।
सचिव इशरत महमूद खान का कहना है, नूपुर पांडेय उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे गांवों से बड़े सपने देखती हैं।
यह क्षण सिर्फ परिवार या गांव का नहीं, बल्कि बहराइच का गर्व बन गया है। क्रिकेट जानकारों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म और मेहनत को देखते हुए, आने वाले वर्षों में नूपुर पांडेय का राष्ट्रीय मंच पर चमकना तय है।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ही अंतिम लक्ष्य
नूपुर पांडेय का सपना स्पष्ट है —
“एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना और विश्व स्तर पर भारत का परचम लहराना।”
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय सचिव इशरत महमूद खान और कोच आसिफ रजा को दिया और कहा कि उनका सहयोग ही सबसे बड़ी पूंजी है।
नूपुर पांडेय ने साबित किया है कि सपनों की शुरुआत जगह से नहीं, इरादों से होती है। बहराइच की बेटी आज न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश की उभरती उम्मीद है।
अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय में भारतीय महिला क्रिकेट टीम में उनका नाम शामिल होना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।



